उत्तर प्रदेश रोडवेज एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले बुधवार को बरेली में रोडवेज कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन निजीकरण, डग्गामारी और मुख्यमंत्री ग्रामीण योजना 2026 के विरोध में किया गया। कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट और क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा। कर्मचारियों का आरोप है कि परिवहन निगम को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया जा रहा है, जबकि निजी ऑपरेटरों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष राम कुमार उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण योजना 2026 के तहत निजी बस संचालकों को मात्र 1500 रुपये मासिक शुल्क लेकर रोडवेज बस अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दी जा रही है। इससे निगम को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां रोडवेज के हित में नहीं, बल्कि निजी परिवहन कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाली हैं।
कर्मचारियों ने मांग की कि रोडवेज के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए। इसके साथ ही, अवैध डग्गामारी पर सख्ती से कार्रवाई हो और कर्मचारियों को राज्य कर्मियों की तरह समय पर भत्ते दिए जाएं। उन्होंने राजस्थान की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी महिलाओं को बस किराये में 50 प्रतिशत छूट देने की मांग उठाई।
वहीं, संघ के क्षेत्रीय मंत्री रविंद्र पांडे ने कहा कि प्रदेश में डग्गामारी चरम पर पहुंच चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एआरटीओ कार्यालयों की अनदेखी के चलते ओवरलोडेड और अवैध वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में है।
पांडे ने यह भी कहा कि रोडवेज कर्मचारी जनता को सुरक्षित यात्रा प्रदान करते हैं, जबकि निजी और अवैध वाहनों में अक्सर अराजकता का माहौल बना रहता है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि 26 मई से पहले सरकार ने वार्ता कर कोई समाधान नहीं निकाला, तो लखनऊ स्थित 'टेढ़ी कोठी' का घेराव किया जाएगा। उन्होंने जरूरत पड़ने पर प्रदेशव्यापी चक्का जाम करने की भी बात कही। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कर्मचारी और यूनियन पदाधिकारी मौजूद रहे।