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क्या मृत्यु के बाद मन का अस्तित्व बना रहता है? गीता का यह एक ऐसा रहस्य है जिसे अब विज्ञान भी सुलझाने का प्रयास कर रहा है।

क्या मृत्यु के बाद भी मन और चेतना जीवित रहती है? जानिए गीता, उपनिषद और आधुनिक विज्ञान क्या कहते हैं मृत्यु, आत्मा और पांच ज्ञानेन्द्रियों के रहस्य पर.

क्या मृत्यु के बाद मन का अस्तित्व बना रहता है? गीता का यह एक ऐसा रहस्य है जिसे अब विज्ञान भी सुलझाने का प्रयास कर रहा है।
📌 मुख्य बातें

क्या मृत्यु के बाद भी मन और चेतना जीवित रहती है? जानिए गीता, उपनिषद और आधुनिक विज्ञान क्या कहते हैं मृत्यु, आत्मा और पांच ज्ञानेन्द्रियों के रहस्य पर.

मृत्यु के बाद क्या सब खत्म हो जाता है? या फिर शरीर के जाने के बाद भी कुछ ऐसा बचता है जो अपनी यात्रा जारी रखता है? यह सवाल हजारों वर्षों से इंसान को बेचैन करता आया है.

लेकिन भारतीय दर्शन इस पर बहुत स्पष्ट बात करता है. वेद, उपनिषद और गीता कहते हैं कि मृत्यु केवल शरीर का अंत है, चेतना का नहीं. यही कारण है कि सनातन दर्शन में कहा गया है कि मृत्यु के बाद जीवात्मा अपने साथ मन और पांच ज्ञानेन्द्रियों की सूक्ष्म शक्तियों को लेकर आगे बढ़ती है.

आज जब दुनिया Consciousness, Near Death Experience और Human Mind पर रिसर्च कर रही है, तब गीता की ये बात फिर चर्चा में आ गई है. मृत्यु के समय वास्तव में क्या होता है? भारतीय दर्शन के अनुसार मनुष्य केवल शरीर नहीं है. उसके तीन स्तर माने गए हैं:

  1. स्थूल शरीर- स्थूल शरीर यानी वह शरीर जिसे हम देख सकते हैं.
  2. सूक्ष्म शरीर- सूक्ष्म शरीर में मन, बुद्धि, प्राण और इंद्रियों की शक्ति शामिल होती है.
  3. कारण शरीर- जबकि कारण शरीर में कर्म और संस्कार छिपे रहते हैं.

मृत्यु के समय स्थूल शरीर समाप्त हो जाता है, लेकिन सूक्ष्म शरीर अपनी यात्रा जारी रखता है. यही कारण है कि शास्त्रों में कहा गया कि जीवात्मा मन और ज्ञानेन्द्रियों को साथ लेकर जाती है.

गीता में क्या लिखा है?

भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं- जैसे वायु फूलों से सुगंध को लेकर चलती है, वैसे ही जीवात्मा शरीर छोड़ते समय मन और इंद्रियों को साथ लेकर जाती है.

यहां आंख, कान या जीभ जैसे अंगों की बात नहीं हो रही. यहां उन सूक्ष्म शक्तियों की बात हो रही है जिनसे मनुष्य देखता, सुनता, महसूस करता और इच्छाएं बनाता है.

पांच ज्ञानेन्द्रियां कौन सी हैं?

सनातन दर्शन में पांच ज्ञानेन्द्रियों का वर्णन मिलता है:

  1. आंख - देखने की शक्ति
  2. कान - सुनने की शक्ति
  3. नाक - गंध पहचानने की शक्ति
  4. जीभ - स्वाद की शक्ति
  5. त्वचा - स्पर्श की अनुभूति

शरीर नष्ट होने के बाद भी इनकी सूक्ष्म प्रवृत्तियां जीव के साथ रहती हैं. इसी आधार पर अगले जन्म और अनुभवों की दिशा तय होती है.

मन को सबसे महत्वपूर्ण क्यों माना गया?

भारतीय ऋषियों ने हमेशा कहा कि मन ही बंधन है और मन ही मुक्ति.

अगर मृत्यु के बाद भी मन और संस्कार साथ जाने वाले हैं, तो सबसे जरूरी वही हैं. यही कारण है कि योग, ध्यान, जप और साधना को केवल धार्मिक क्रिया नहीं माना गया, बल्कि मन को शुद्ध करने की प्रक्रिया कहा गया.

आज भी अगर कोई व्यक्ति लगातार क्रोध, भय, ईर्ष्या या चिंता में जीता है, तो उसका प्रभाव केवल वर्तमान जीवन पर नहीं, बल्कि उसकी चेतना पर भी पड़ता है.

विज्ञान अब किन सवालों पर पहुंच चुका है?

आज दुनिया के वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या चेतना केवल दिमाग तक सीमित है?

Near Death Experience यानी मृत्यु के करीब पहुंच चुके लोगों के अनुभवों ने इस बहस को और गहरा किया है. कई लोगों ने दावा किया कि शरीर निष्क्रिय होने के बावजूद उन्हें आसपास की बातें याद रहीं.

हालांकि विज्ञान अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है, लेकिन यह जरूर सच है कि Consciousness आज दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक विषयों में शामिल हो चुका है.

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय दर्शन हजारों साल पहले से चेतना को शरीर से अलग मानता आया है.

क्या मृत्यु का डर खत्म हो सकता है?

भारतीय दर्शन कहता है कि मृत्यु का सबसे बड़ा कारण अज्ञान है. इंसान शरीर को ही 'मैं' मान लेता है, इसलिए उसे अंत का भय सताता है.

लेकिन जब व्यक्ति समझने लगता है कि वह केवल शरीर नहीं, बल्कि चेतना है, तब जीवन और मृत्यु दोनों को देखने का नजरिया बदलने लगता है.

कठोपनिषद में मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि एक द्वार कहा गया है.

आज के समय में यह ज्ञान क्यों जरूरी है?

2026 का दौर तेज रफ्तार, तनाव और मानसिक अस्थिरता का दौर माना जा रहा है. लोग बाहर से सफल दिखते हैं, लेकिन भीतर बेचैनी, अकेलापन और डर बढ़ता जा रहा है.

ऐसे समय में भारतीय दर्शन एक गहरी बात कहता है. अगर अंत में मन ही साथ जाने वाला है, तो सबसे ज्यादा ध्यान उसी पर देना चाहिए. धन, पद, प्रसिद्धि और बहस यहीं रह जाएगी. लेकिन आपके संस्कार, आपका स्वभाव और आपकी चेतना… वही आपकी अगली यात्रा का आधार बनेंगे.

शायद इसी कारण ऋषियों ने कहा था

मृत्यु से पहले स्वयं को जान लो क्योंकि जिसने स्वयं को समझ लिया, उसके लिए मृत्यु केवल अंत नहीं रहती… बल्कि एक नई यात्रा का आरंभ बन जाती है.

FAQ
मृत्यु के बाद क्या आत्मा जीवित रहती है?

सनातन दर्शन के अनुसार आत्मा अमर मानी गई है. शरीर समाप्त होता है, लेकिन चेतना की यात्रा जारी रहती है.

क्या पांच ज्ञानेन्द्रियां सच में साथ जाती हैं?

शास्त्रों के अनुसार इनके स्थूल अंग नहीं, बल्कि सूक्ष्म शक्तियां और प्रवृत्तियां जीव के साथ जाती हैं.

गीता में मृत्यु के बारे में क्या कहा गया है?

भगवद्गीता और अध्याय 15 में आत्मा को अविनाशी बताया गया है.



Source: ABP LIVE
लाइफ-साइंस ABP LIVE

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